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यहूदी की लड़की का समीक्षा

पुस्तक का नाम :- यहूदी की लड़की लेखक              :- आग़ा हश्र कश्मीरी लेखन की विधा  :- नाटक 'यहूदी की लड़की' नाटक  का नाम पहली बार मैं स्नातक तृतीय वर्ष के पाठ्यक्रम में पढ़ा तो बहुत उत्सुकता हुई की पढ़ा जाय यह नाटक कैसा है, चूंकि आग़ा हश्र कश्मीरी का नाम पहले से सुना हुआ था, तो मैं फौरन इस किताब को खरीद और एक ही दिन में इसे पूरा पढ़ डाला, और मैं अपने अध्ययन के आधार पर आपके समक्ष इसकी एक रूपरेखा प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा हूँ, आपको कैसा लगा यह आप अवश्य बताइयेगा, जिससे मेरा उत्साहवर्धन हो और अगली बार और अच्छा कर सकूँ ।          आइये तो शुरू करते है इस नाटक के पहले दृश्य के पहले अंक से, जैसे ही पर्दा उठता है मंच पर डैसिया और सहेलियों के आगमन होता है, जिसमें डैसिया अपने होने वाले शौहर के उपेक्षा से विरह की उस व्यथा को अनुभव कर रही है, जो प्रेमी अपने प्रेमिका से बिछड़ने के बाद करता है, एक चातक चातकी से बिछड़ने पर करता है, और शायद पपीहा भी अपने युगल के विरह में ही पीहू-पीहू करता है । यहीं पर डैसिया अपने मंगेतर को आता देख...

दंगा क्या हैं

परसों दोपहर में मैं फैक्लटी पहुँचा चुकी मन तो नहीं था लेकिन परीक्षा की वजह से जाना पड़ा, एक मित्र मिले मुझे कुशल क्षेम पूछे, मैं भी लगे हाथ उनसे भी पूछ लिया । उसके बाद बोले मिलते है गुरु परीक्षा के बाद । हम भी हामी भर दिए, उसके बाद मैं परीक्षा खत्म कर के एक दोस्त के जन्मदिन की भव्य पार्टी में शिरकत करने के बाद, उस महानुभाव को कॉल किया कि आखिर क्या बात करनी थी उन्हें मुझसे ? कॉल उठाते बोले :- हेलो मैं :- हाँ भाई राम राम पीयूष (बदला हुआ नाम) :- महादेव मैं :- तब मिले के बोलले रहुव पीयूष :- ह आव भीटी मैं :- चल 5 मिनट में आव तानी मैं पहुचाँ वहाँ, ओ वहाँ पहले से ही किसी के साथ चाय और समोसे के चटकारे के साथ इश्क लड़ा रहे थे । मैं पहले तो सोचा चला जाता हूँ जब ये बुलाये ही है तो, लेकिन फिर झेंप गया । आखिर में फिर से कॉल किया उन्होंने बुला लिया । मेरा परिचय कराया अपनी महबूब सनम से पीयूष :-  रागिनी (बदला हुआ नाम ), ये मेरे फायर ब्रिगेड उज्ज्वल भाई पीयूष :- और उज्ज्वल, ये मेरी माशूका रागिनी मैं बोला :-  नमस्ते उन्होंने हाथ आगे बढ़ा दिए, मैं भी हाथ मिलाकर हेलो बोला रागिनी :- क्...
भारत में आजादी क्रांति की अलख जगाने वाले को नमन आज करता हूँ मैं अपने वीर सेनानी को नाम हैं जिसका खुदीराम बोस अंग्रेजो का उड़ाया जो होश कर के नारे, आजादी के बुलन्द श्वास देश के लिए हुए जो बन्द आज ओ पावस घड़ी है आई सबकी आँखे नम हो आई हो गए जो बलि बेदी पर होम बना होगा  पत्थर हृदय भी मोम बढ़ाया निज चमन का मान तोड़ा अंग्रेजों का अभिमान चमकाया जिसने ये चमन उज्ज्वल करता है आज उन्हें नमन                                    उज्ज्वल कुमार सिंह                                        हिन्दी विभाग                              काशी हिन्दू विश्वविद्यालय https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1956725361235774&id=100006949862921
देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद के जन्मदिन पर उन्हें शत शत नमन ब्रिटिश शासन के काले दिनों में, हीरा सरीखा चमका जो देशरत्न कहलाया , संसद के साधु के नाम से दमका ओ देश का पुराधा बतला गया, मान बढ़ाया निज भारत का अंग्रेज भी सामने आ न पाय, ऐसा छक्का छुड़ाया ओ ब्रिटिश शासन के काले दिनों में, हीरा सरीखा चमका ओ कुशाग्रबुद्धि और वाक निपुणता, थे जिसके अचूक हथियार कॉपी में कोई गलती न पाकर, झुक गई अंग्रेज सरकार आज उस देशरत्न को, देश करता शत शत नमन आज के दिन का ओ मान बढ़ाया, तिरंगा सबसे ऊपर फहराया ओ ब्रिटिश शासन के काले दिनों में, हीरा सरीखा चमका ओ                                   उज्ज्वल कुमार सिंह                                       हिन्दी विभाग                            काशी हिन्दू विश्वविद्यालय https://m.facebook.com/st...
                  महामना आपकी बगिया महामना आपकी बगिया आपसे कुछ कह रही है अपनी अस्मिता की ख़ातिर, पत्थरों से लड़ रही है कभी कुचला जाता था पैरों तले, बाद में गर्भ में कुचल दी गई जब आपसे माँगने लगी इंसाफ़ तो, आपके कथित नुमाइंदों द्वारा मसल दी गई आख़िर कब तक सत्य के बाद आत्मरक्षा करेगी आपकी बगिया अब पहले आत्मरक्षा बाद में सत्य जानना चाहती है बगिया भारतरत्न आप फिर से आओ क्योकि आपके बाग पर कौओं की नज़र पड़ गई है कुंठाओं में ग्रसित रहकर, आत्मा उनकी सड़ गई है महामना आज आप ही बताइये, किसी ने आपको कालिख़ पोती क्या ? या कुछ लोगो को बहुत स्वादिष्ट लगने लगा है, आपकी बगिया की बोटी क्या ? आपकी बगिया पर आज कौए रोज इतराते है नोंच कर इसकी बोटी बोटी, खूनी फाग मानते है महामना आपको आना होगा, बगिया आज खतरे में हैं आपके हर एक बेटी की अस्मिता खतरे में है आइए आप मार दीजिए कौओं को या मिटा दीजिए बगिया को ताकि कोई आँच न आये फिर से आपकी बगिया को                             उज्ज्वल कुमार सिं...
मुझे मिल गई मेरी सपनों की रानी क्या मैं सुनाऊ अपनी कहानी जब से मेरी उस से नैन मिली हैं मेरे दिल के अंदर, खुशियां खिली है प्यासे हृदय को मिली, शीतल पानी मुझे मिल गई मेरी सपनों की रानी -2 उसके कपोलों का दीवाना हुआ हूँ की ऐसी जादू, उसकी परवाना हुआ हूँ चेहरा है चंद्रमुखी, पाँव में जो पायल छनक-छनक मुझको करे तो घायल मेरी महबूबा है, बहुत सयानी मुझे मिल गई मेरी सपनों की रानी -2 उर जिसका निर्मल है, कटी है निराली मेरे मन को मोहे, अधरों की लाली नैन है जिसकी, मृग जैसा चंचल मुझको समेटे है , उसके दिल के अंचल कैसे बताऊ मैं अपने प्यार की कहानी मुझे मिल गई मेरी सपनों की रानी -2 झुल्फों की साया में, मैं ठहर जाऊ जहाँ भी मैं जाऊ, केवल उसी को मैं पाऊ सपनों में, यादों में , मेरे ख्यालों में समाई हर जगह देखता हूँ, तेरी परछाई प्यार उसका दान है, ओ सबसे बड़ी दानी मुझे मिल गई मेरी सपनों की रानी                                 उज्ज्वल कुमार सिंह                  ...

कैसे जश्न मनाऊ मैं

मन तो मेरा क्रुद्ध रहता है, क्या झुमु नाचूँ गाउ मैं आजादी के 70 वर्षों का, कैसे जश्न मनाऊ मैं बच्चे आज भी भूखे मरते, है जहाँ की धरती पर संविधान मरा पड़ा है, लोकतंत्र हैं अर्थी पर कभी कभी गर्वित होता हूँ, अपने देश की थाती पर आस्तीन के सांप लेटे है, लालकिले की छाती पर मंहगाई की मार पड़ी है, भरपेट कहाँ से खाऊ मैं आजादी के 70 वर्षों का, कैसे जश्न मनाऊ मैं कोई हमारे सैनिक पर , रोज पत्थर बरसाता है जानवरों का चारा भी, नेता चट कर जाता है रक्षक खोये खोये रहते है, पाक चीन की बॉर्डर पर पता ना ख़ामोश क्यों रहते हैं, किस नेता की आर्डर पर इन सब मौसम में , बसंती हवा कहाँ से लाउ मैं आजादी के 70 वर्षों का, कैसे जश्न मनाऊ मैं हमारे युवा भागते रहते है, कुछ सुंदरियों के पीछे क्या इसी के खातिर, आजाद आज़ादी को सींचे एक इंकलाब के खातिर, भगत सिंह थे फाँसी झूल गए आज हम सलमान के आगे, खुदी राम को भूल गए ऐसी जज्बातों के संग, अब कहाँ को जाउ मैं आजादी के 70 वर्षों का, कैसे जश्न मनाऊ मैं                                 ...